शिवलिंग पर क्या नही चढ़ाना चाहिए (Shivling Par Kya Nahi Chadhana Chahiye)

भगवान शिव शीघ्र ही प्रशन्न होने वाले देव है। पूरे तन मन धन अर्थात निस्वार्थ भाव से जो जातक भगवान शिव जी की पूजा करता है, उस व्यक्ति की सारी मनोकामनाएँ भगवान भोलेनाथ शीघ्र ही पूरा कर देते है। पूरे भारत ही नही अपितु विदेशों में शिवलिंग के रूप में भगवान भोलेनाथ को पूजा जाता हैं। शिवलिंग की पूजन अर्चन का अलग विधि विधान है क्योंकि कुछ वस्तु शिवलिंग पर चढाना नही चाहिए क्योंकि पूजा मानी जाती है अधूरी अतः यह पोस्ट अवश्य पढ़े। 

शिव महापुराण में शिवलिंग की पूजा का विधि विधान बताया गया है, लेकिन व्यक्ति पूजा करने के बाद भी नहीं सफल होता है आखिर क्यों? इन सभी बातों का जवाब इस लेख के माध्यम से देंगे की शिवलिंग पर क्या नहीं चढ़ाना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार यदि विधि विधान से शिवलिंग की पूजा किया जाए और विधि विधान का ध्यान रखा जाए तो निश्चित ही भगवान् भोलेनाथ प्रशन्न हो जाते है

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शिवलिंग पर क्या नही चढ़ाना चाहिए (Shivling Par Kya Nahi Chadhana Chahiye)

देश विदेश में भगवान भोलेनाथ के मंदिर प्राचीन काल से देखने को मिलते है। देश के हर कोने में भगवान भोलेनाथ से जुड़े धार्मिक स्थल है। विदेशों में भी भगवान भोलेनाथ के मंदिर है। जहाँ पर भगवान् भोलेनाथ अलग अलग स्वरुप में विराजमान हैं।

भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना अलग अलग जगहों पर अनेको प्रकार से देखने को मिलते है। भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर पूजा सामग्री के रूप में कुछ चीज चढ़ाना वर्जित माना गया है। इनमे मुख्य रूप से हर मंदिर में पूजन सामग्री के रूप से शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाना वर्जित माना गया है। इसके पीछे तमाम कारण है। इस पोस्ट में शिवलिंग पर हल्दी,केतकी का पुष्प, तुलसी क्यों नही अर्पित करते है।

शिवलिंग पर क्या नही चढ़ाना चाहिए (Shivling Par Kya Nahi Chadhana Chahiye)

प्रायः हम सभी भगवान शिव की पूजा करते है लेकिन अज्ञानतावश कुछ वस्तु जैसे हल्दी, सिन्दूर, तुलसी, लाल रंग के फूल, केतकी के फूल, केवड़े के फूल शिवलिंग पर चढ़ा देते है, जिससे जातक को पूजा का फल नही मिलता है, आइये जानते है की ये वस्तु  हल्दी, सिन्दूर, तुलसी, लाल रंग के फूल, केतकी के फूल, केवड़े के फूल शिवलिंग पर क्यों नहीं चढ़ाना चाहिए आइये जानते है, इस लेख के माध्यम से

शिवलिंग पर हल्दी क्यों नहीं चढाते हैं

भगवान भोलेनाथ भक्तों के स्मरण मात्र से शीघ्र प्रशन्न हो जाते हैलेकिन अगर कुछ पापपर्ण कर्मो से पूजन करना या फिर पूजन सामग्री के रूप में वर्जित चीज चढ़ाना जैसे शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाने से भगवान शिव जी नाराज हो जाते है, आपकी जानकारी के लिए बता दू की यदि किसी कारणवश भगवान भोलेनाथ नाराज हुए तो मनाना बहुत ही कठिन हो जाता है। 

भगवान भोलेनाथ से जुडी पौराणिक कथा:शास्त्रानुसार हल्दी को स्त्रियों से सम्बंधित माना जाता है, और शिवलिंग को पुरुष तत्त्व का प्रतीक माना जाता है, इसलिए ही शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ाया जाता है। शिवलिंग को छोड़कर अन्य सभी देवी देवताओं को हल्दी अर्पित करने में कोई मतभेद नहीं है। शिवलिंग पर हल्दी चढाने को लेकर अलग अलग मत हैं लोगों के कुछ लोग शिव लिंग पर हल्दी चढाने से वृहस्पति देव खुश हो जाने के कारण चढाते है और कुछ लोगों की धारणा यह है, शिवलिंग पर हल्दी चढाने से पूजा का पूर्ण फल नही मिलता है। शास्त्रानुसार भगवान भोलेनाथ पर हल्दी चढाने से जातक पर भोलेनाथ तुरंत क्रोधित हो जाते है और व्यक्ति जिन्दगी भर परेशान रहता है।

केतकी का पुष्प क्यों नही चढाते है शिवलिंग पर:

पौराणिक कथाओं में यह भी उल्लेखित है की ब्रम्हा जी के झूठ बोलने में केतकी के फूल ने साथ दिया था केतकी केफूल के द्वारा इस तरह के कामों में संलिप्त रहने से भगवान् भोलेनाथ केतकी फूल से नाराज होकर श्राप दे दिया थाजिसके फलस्वरूप भगवान शिव ने वचन दिया की अब कोई भी भक्त केतकी का फूल भूलकर भी शिवलिंग पर नही चढ़ाएगा इसी श्राप के बाद भगवान भोलेनाथ पर केतकी का फूल अर्पित करना निषेध अर्थात अशुभता माना जाने लगा।

तुलसी को शिव को क्यों नहीं चढ़ाया जाता है,

आइये जानते है इस लेख के माध्यम से , तुलसी को शिव को क्यों नहीं चढ़ाया जाता है?
आप लोगो के जानकारी के लिए बता दूं कितुलसी जी के पति का नाम जालंधर था, पौराणिक कथाओं के अनुसार तुलसी जी के पूर्व जन्म का नाम वृन्दा था। तुलसी जी का विवाह जालंधर से हुआ था, जो की राक्षसी कुल से था। जालंधर अपने पापकर्मों के कारण राक्षस कुल में जन्म पाया था। जालंधर नाम के राक्षस की पत्नी वृन्दा थी, जिनका जन्म भगवान भोलेनाथ के अंश के रूप में हुआ था। भगवान् शिव के अंश के रूप में जन्म होने के कारण वृन्दा के पति जालंधर को कोई भी मार नही सकता था। वृन्दा स्वयं जालंधर की पत्नी थी और पतिव्रता भी थी क्योंकि एक स्त्री का इस संसार में पति से बढ़कर कोई नही है।
जालंधर राक्षस के पापकर्मों से सभी लोग त्राहि त्राहि करते थे।यह सब पुकार भगवान विष्णु को पता चला तत्पचात विष्णु भगवान ने स्वयं लोगों के कल्याण के लिए जालंधर का रूप धारण करके वृन्दा के पतिव्रता धर्म को तोड़ दिया और जब यह बात वृन्दा को पता चला की विष्णु भगवान ने उसकी पतिव्रता को भंग कर दिया तब वृन्दा ने भगवान विष्णु से कहा कि आप ने इस तरह मेरे पतिव्रता धर्म को भंग करके अच्छा नहीं किया है और आप पत्थर बन जाएँगे।तत्पचात भगवान विष्णु ने वृन्दा को बताया की तुम्हारे बचाव के कारण ही जालंधर का वध किया हैइस तरह से विष्णु भगवान् ने वृन्दा को भी श्रापित करके बोले जाओ लकड़ी की बन जाओ तदुपरांत भगवान भोले नाथ ने जालंधर राक्षस का वध कर दिया। भगवान् विष्णु के श्राप से वृन्दा कालांतर में तुलसी का पौधा बन गयी और ऐसी पौराणिक मान्यता भी है की तुलसी श्रापित है,और भगवान भोलेनाथ के द्वारा जालंधर का वध करने के कारण ही शिवलिंग पर तुलसी नहीं चढ़ाया जाता है।

👉इसके अलावा यहाँ कुछ वस्तुओं के नाम दिए गये है जिसको शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए -

  • भगवान् शिव की पूजा में हल्दी
  • शंख
  • नारियल का पानी ( खासकर अभिषेक करना वर्जित माना गया है - शास्त्रानुसार)
  • कमल
  • लाल रंग के पुष्प
  • केतकी के फूल
  • केवड़े के पुष्प
  • रोलिसकनेर

FAQ:

Ques: शिवलिंग पर जल कब नहीं चढ़ाना चाहिए?

Ans: Astro गौरव के अनुसार भगवान् शिव के महापुराण में शिवलिंग पूजा विधि का उल्लेख मिलता है, शिवलिंग पर किसी भी जातक को सुबह 4 बजे से लेकर 10 बजे तक जल चढ़ाना चाहिए और गलती से भी शिवलिंग पर जल रात्री या शाम में नहीं चढ़ाना चाहिए |

Ques: क्या शिवलिंग पर चावल चढ़ा सकते है?

Ans: शिवलिंग पर चावल चढ़ाने से घर की दरिद्रता अर्थात आर्थिक परेशानियों से निजात मिलता है, लेकिन ध्यान रहे अखंडित चावल भूलकर भी शिवलिंग पर कदापि न चढ़ाये|

Ques: शिव जी का प्रिय फूल कौन सा है?

Ans: धतूरे के फूल का भगवान् भोलेनाथ के पूजा में अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान है और संतान प्राप्ति के योग के लिए धतूरे का फूल भगवान् शिव पर चढ़ाना चाहिए, क्योंकि भगवान् शिव जी का प्रिय फूल धतुरा का फूल होता है|

Ques: शिव का प्रिय फल कौन सा है?

Ans: सावन के सोमवार की बात करे या फिर महीने के प्रत्येक सोमवार की शिवलिंग की पूजा में धतुरा के पत्ते और फल दोनों का अत्यधिक महत्व है| आप लोगों की जानकारी के लिए बताना चाहूँगा भगवान् शिव का प्रिय फल धतुरा का फल होता है 

Ques: क्या शिवलिंग पर सिन्दूर लगाना चाहिए?

Ans: भगवान् शिव जी जगत के संहारकर्ता के रूप में माने जाते है इसी कारण से शिवलिंग पर भूलकर भी सिन्दूर नहीं चढ़ाया जाता है|

Ques: बुधवार के दिन शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए?

Ans: शिव महापुराण के अनुसार भगवान् भोलेनाथ जी को सफ़ेद फूल अति प्रिय है इसलिए बुधवार के दिन शिवलिंग पर सफ़ेद फूल अवश्य चढ़ाना चाहिए| यदि ऐसा संभव नहीं है तो कम से कम सावन के सोमवार में बुधवार के दिन जातक को सफ़ेद पुष्प अवश्य चढ़ाना चाहिए इससे जातक को शांति मिलती है और बुद्धि का विकास होता है|

Ques: शिव जी को कौन सा फल नहीं चढ़ाना चाहिए?

Ans: ज्योतिषियों की माने तो शिव जी को नारियल का फल नहीं चढाने की सलाह देते है|

निष्कर्ष :

आशा करते है की हमारी यह लेख "शिवलिंग पर क्या नही चढ़ाना चाहिए (Shivling Par Kya Nahi Chadhana Chahiye)" आप सभी लोगों को पसंद आया होगा और कुछ पौराणिक कथा जैसे तुलसी को शिव को क्यों नहीं चढ़ाया जाता है और शिवलिंग पर हल्दी, केतकी का पुष्प क्यों नहीं चढ़ाया जाता है पढ़कर आप सभी लोगों को अच्छा लगा होगा| RATNGYAN वेबसाइट पर इस तरह की लेख जैसे ASTROLGY, Upay, Mantra, चालीसा, Stotram इत्यादि जीवनों उपयोगी लेख समय समय पर ज्योतिषाचार्य गौरव जी के द्वारा प्रस्तुत किये जाते है| अतः आप सभी लोग यह वेबसाइट अवश्य याद रखे|

यह जानकारी विभिन्न धर्मग्रंथों में उल्लेखित अंश के रूप में है, कितना प्रतिशत सही है या गलत इस तरह का दावा RATNGYAN वेबसाइट नहीं करता है| अधिक जानकारी के लिए पढ़े डिस्क्लेमर पालिसी|

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